तेरी तानों मैं है ज़ालिम किस क़यामत का असर
बिजलियाँ सी गिर रही हैं खिरमन्-ए-इदराक पर
[खिरमन्-ए-इदराक= अक्ल का खलिहान]
ये खयाल आता है रह रह कर दिले-बेताब मैं
बह न जाऊँ फ़िर तेरे नग्मात के सैलाब मैं
छोडकर आया हूँ किस मुश्किल से मैं जामो-सुबू
आह किस दिल से किया है मैने खूने आरज़ू
फ़िर शबिश्ताने-तरब की राह दिखलाता है तू
मुझको करना चाहता है फ़िर खराबे-रंगो-बू
[शबिश्ताने-तरब = आनंददायक शयनग्रह]
मैंने माना वज़्द मैं दुनिया को ला सकता है तू
मैंने ये माना ग़मे-हस्ती मिटा सकता है तू
[वज़्द = आध्यात्मिक मूर्छा]
मैने माना तेरी मौसिकी है इतनी पुर असर
झूम उठते हैं फ़रिश्ते तक तेरे नग़्मात पर
हॉ ये सच है ज़मजमे तेरे मचाते हैं वो धूम
झूम जाते हैं मनाज़िर, रक़्स करते हैं नज़ूम
[मनाज़िर = द्रश्य, नज़ूम = सितारे]
तेरे ही नग्मे से वाबस्ता निशाते-ज़िन्दगी
तेरे ही नग्मे से कैफ़ो-इंबिसाते-ज़िन्दगी
[वाबस्ता = जुडा हुअ, निशाते-ज़िन्दगी = जीवन का आनंद, कैफ़ो-इंबिसाते-ज़िन्दगी = जीवन का आनंद]
तेरी सौते-सरमदी बाग़े-तसव्वुफ़ की बहार
तेरे ही नग्मे से बेखुद आबिदे-शब-ज़िन्दादार
[सौते-सरमदी = सरमदी धुन, बाग़े-तसव्वुफ़ = सूफ़ीवाद का बाग़, आबिदे-शब-ज़िन्दादार = रातों को जागकर उपासना करने वाला]
बुलबुलें नग़्मासरा हैं तेरी ही तक़लीद में
तेरे ही नग़्मओ से धूमें महफ़िले-नाहीद में
[तक़लीद = नक़ल, नाहीद = शुक्र ग्रह]
मुझको तेरे सेहरे-मौसिकी से कब इंकार है
मुझको तेरे लहने-दाऊदी से कब इंकार है
छोड दे मुतरिब बस अब लिल्लाह पीछा छोड दे
काम का ये वक़्त है कुछ काम करने दे मुझे
[मुतरिब = गायक]
मजाज़ लखनवी


