कुछ पल जगजीत सिंह के नाम

October 14, 2006

कौन कहता है मुहब्बत की ज़ुबाँ होती है

कौन कहता है मुहब्बत की ज़ुबाँ होती है
ये हक़ीक़त तो निगाहों से बयाँ होती है

( ज़ुबाँ : tongue, voice; हक़ीक़त : reality, truth; निगाहों से : through eyes; बयाँ : be described)

वो ना आये तो सताती है एक ख़लिश दिल को
वो जो आये तो ख़लिश और जवाँ होती है

(ख़लिश : anxiety, apprehension; जवाँ : youthful)

रूह को शाद करे दिल को पुर-नूर करे
हर नज़ारे में ये तनवीर कहाँ होती है

(रूह : soul; शाद : make happy, please; पुर-नूर : fill with lighten, luminous; नज़ारे : visions; तनवीर : illumination)

ज़ब्त-ए-सैलाब-ए-मुहब्बत को कहाँ तक रोके
दिल में जो बात हो आखों से बयाँ होती है

(ज़ब्त : patience, restraint; सैलाब-ए-मुहब्बत : flood of love)

ज़िन्दगी एक सुलगती सी चिता है “साहिर”
शोला बनती है ना ये बुझ के धुआँ होती है

(चिता : funeral pyre)

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