अपने हाथों की लकीरों में बसा ले मुझको
मैं हूँ तेरा तो नसीब अपना बना ले मुझको।
( नसीब : destiny)
मुझसे तू पूछने आया है वफ़ा के माने
ये तेरी सादा-दिली मार ना डाले मुझको।
( वफ़ा : fidelity, loyalty; सादा-दिली : simplicity)
ख़ुद को मैं बाँट ना डालूँ कहीं दामन-दामन
कर दिया तूने अगर मेरे हवाले मुझको।
(दामन-दामन : in tatters)
वादा फिर वादा है मैं ज़हर भी पी जाऊँ ‘क़तील’
शर्त ये है कोई बाहों में सम्भाले मुझको।
(वादा : promise)




डा. रमा द्विवेदी …said
वाह वाह !बहुत ही खूब सूरत गज़ल है….खासकर ये शेर दिल में बहुत
गहरे उतर जाते हैं। ढेरों बधाई एवं अनेकों शुभ कामनाओंसहित…
मुझसे तू पूछने आया है वफ़ा के माने
ये तेरी सादा-दिली मार ना डाले मुझको।
वादा फिर वादा है मैं ज़हर भी पी जाऊँ ‘क़तील’
शर्त ये है कोई बाहों में सम्भाले मुझको।
Comment by ramadwivedi — October 17, 2006 @ 10:25 am |
masha allah khubsurat
Comment by mehhekk — December 1, 2007 @ 4:26 pm |