कुछ पल जगजीत सिंह के नाम

October 16, 2006

अपने हाथों की लकीरों में बसा ले मुझको

अपने हाथों की लकीरों में बसा ले मुझको
मैं हूँ तेरा तो नसीब अपना बना ले मुझको।

( नसीब : destiny)

मुझसे तू पूछने आया है वफ़ा के माने
ये तेरी सादा-दिली मार ना डाले मुझको।

( वफ़ा : fidelity, loyalty; सादा-दिली : simplicity)

ख़ुद को मैं बाँट ना डालूँ कहीं दामन-दामन
कर दिया तूने अगर मेरे हवाले मुझको।

(दामन-दामन : in tatters)

वादा फिर वादा है मैं ज़हर भी पी जाऊँ ‘क़तील’
शर्त ये है कोई बाहों में सम्भाले मुझको।

(वादा : promise)

2 Comments »

  1. डा. रमा द्विवेदी …said

    वाह वाह !बहुत ही खूब सूरत गज़ल है….खासकर ये शेर दिल में बहुत
    गहरे उतर जाते हैं। ढेरों बधाई एवं अनेकों शुभ कामनाओंसहित…

    मुझसे तू पूछने आया है वफ़ा के माने
    ये तेरी सादा-दिली मार ना डाले मुझको।

    वादा फिर वादा है मैं ज़हर भी पी जाऊँ ‘क़तील’
    शर्त ये है कोई बाहों में सम्भाले मुझको।

    Comment by ramadwivedi — October 17, 2006 @ 10:25 am | Reply

  2. masha allah khubsurat

    Comment by mehhekk — December 1, 2007 @ 4:26 pm | Reply


RSS feed for comments on this post. TrackBack URI

Leave a comment

Blog at WordPress.com.