कुछ पल जगजीत सिंह के नाम

October 16, 2006

दिल को ग़मे हयात गवारा है इन दिनों

दिल को ग़मे हयात गवारा है इन दिनों
पहले जो दर्द था वही चारा है इन दिनों

(ग़मे हयात : sufferings of life; चारा : cure, remedy)

ये दिल, ज़रा सा दिल तेरी यादों में खो गया है
ज़र्रे को आँन्धियों का सहारा है इन दिनों

(ज़र्रा : dust particle)

तुम आ ना सको तो शब को बढ़ा दूँ कुछ और भी
अपने कहे में सुब्ह का तारा है इन दिनों

(शब : night)

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