कुछ पल जगजीत सिंह के नाम

October 16, 2006

तुम्हारी अन्जुमन से उठ के दीवाने कहाँ जात

तुम्हारी अन्जुमन से उठ के दीवाने कहाँ जाते
जो वाबिस्ता हुये तुम से वो अफसाने कहाँ जाते

(अन्जुमन : gathering, assembly; वाबिस्ता : attached)

निकल करा दैरो काबा से अगर मिलता ना मैख़ाना
तो ठुकराये हुये इन्सान ख़ुदा जाने कहाँ जाते

(दैरो काबा : temple and the mosque; मैख़ाना : wine-house, tavern)

तुम्हारी बेरुख़ी ने लाज रख ली बादा-ख़ाने की
तुम आँखों से पिला देते तो पैमानें कहाँ जाते

(बेरुख़ी : rudeness; बादा-ख़ाने : wine-houese, tavern; पैमानें : glasses of wine)

चलो अच्छा हुआ काम आ गयी दीवानग़ी अपनी
वगरना हम जमाने भर को समझाने कहाँ जाते

(वगरना : otherwise)

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