कुछ पल जगजीत सिंह के नाम

October 16, 2006

ये मोजेज़ा भी मुहब्बत कभी दिखाये मुझे

ये मोजेज़ा भी मुहब्बत कभी दिखाये मुझे
के सँग तुझपे गिरे और ज़ख्म आये मुझे

(मोजेज़ा : miracle; सँग: stone; ज़ख्म : wound)

वो मेहरबाँ है तो इक़रार क्यूँ नहीं करता
वो बद-गुमाँ है तो सौ बार आज़माये मुझे

(मेहरबाँ : benign; इक़रार : accept; बद-गुमाँ : doubtful; आज़माये : test)

वो मेरा दोस्त है सारे जहाँन को मालूम
दग़ा करे वो किसी से तो शर्म आये मुझे

(जहाँन : world; दग़ा : fraud; शर्म : shame)

मैं अपनी ज़ात में नीलाम हो रहा हूँ ‘क़तील’
ग़मे हयात से कह दो ख़रीद लाये मुझे

(ज़ात : self, soul, being; ग़मे हयात : sufferings of the life)

1 Comment »

  1. it’s good for people who knows the importance of this

    Comment by Amarendra Kumar — November 20, 2006 @ 1:47 am | Reply


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