कुछ पल जगजीत सिंह के नाम

October 30, 2006

ऐ काश वो किसी दिन

ऐ काश वो किसी दिन तन्हाईयो मे आये
उनको ये राज़-ए-दिल हम महफिल मे क्या बताये

लगता है डर उन्हे तो हमराज़ ले के आये
जो पुछना है पुछे कहना है जो सुनाये

तोबा हमारी हमदम उन्हे हाथ भी लगाये
ऐ काश वो किसी दिन तन्हाईयो मे आये

उन्हे इश्क़ अगर न होता पल्के नही झुकाते
गालो पे शोख बादल ज़ुल्फो के न गिराते

करदे न क़त्ल हमको मासूम ये अदाये
ऐ काश वो किसी दिन तन्हाईयो मे आये

ऐ काश वो किसी दिन् टन्हयियो मेइन् आये
उनको ये राज़-ए-दिल हम महफिल मे क्या बताये

है लौ ज़िंदगी

है लौ ज़िंदगी ज़िंदगी नूर है
मगर इस पे जलने का दस्तूर
है लौ ज़िंदगी

कभी सामने आता मिलने उसे
बड़ा नाम् उसका है मशहूर है

है लौ ज़िंदगी ज़िंदगी नूर है
मगर इस पे जलने का दस्तूर
है लौ ज़िंदगी

भवर पास है चल पहन ले इसे
किनारे का फदा बहुत दूर है

है लौ ज़िंदगी ज़िंदगी नूर है
मगर इस पे जलने का दस्तूर
है लौ ज़िंदगी

सुना है वो ही करने वाला है सब
सुना है के इंसान मज़बूर है

है लौ ज़िंदगी ज़िंदगी नूर है
मगर इस पे जलने का दस्तूर
है लौ ज़िंदगी

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