याद नहीं क्या क्या देखा था सारे मंज़र भूल गये,
उसकी गलियों से जब लौटे अपना भी घर भूल गये,
ख़ूब गये परदेस कि अपने दीवार-ओ-दर भूल गये,
शीशमहल ने ऐसा घेरा मिट्टी के घर भूल गये,
तुझको भी जब अपनी क़समें अपने वादे याद नहीं,
हम भी अपने ख़्वाब तेरी आँखों में रखकर भूल गये,
मुझको जिन्होने क़त्ल किया है कोई उन्हे बतलाये ”नज़ीर”,
मेरी लाश के पहलू में वो अपना ख़न्जर भूल गये,
Lyrics: Nazir Bakri
Singer: Jagjit Singh




Its one of the loveliest ghazals I listen to. Thanx to you for publishing the lyrics in Hindi.
Jagjit Singh jee is simply the best Ghazal singer……..
Comment by Anurag Sindhu — February 4, 2007 @ 9:21 pm |