ये शीशे ये सपने ये रिश्ते यह धागे,
किसे क्या खबर है कहां टूट जायें,
मोहब्बत के दरिया मे तिनके वफ़ा के,
न जाने यह किस मोड पर डूब जायें,
अजब दिल की वादी अजब दिल की बस्ती,
हर एक मोड मौसम नयी ख्वाइशों का,
लगाये हैं हमने यह सपनों के पौधे,
मगर क्या भरोसा यहां बारिशों का,
मुरादों की मंज़िल के सपनों मे खोये,
मोहब्बत की राहों पे हम चल पडे थे,
ज़रा दूर चल कर जब आंखे खोला तो,
कडी धूप मे हम अकेले खडे थे,
जिन्हे दिल से चाहा जिन्हें दिल से पूजा,
नज़र आ रहे हैं वोही अजनबी से,
रवायत है शायद यह सदियों पुरानी,
शिकायत नही है कोई ज़िन्दगी से,




i want this song plz send it 2 my email vishsanjiv@yahoo.com
Comment by sanjeev — March 9, 2007 @ 4:21 pm |
tht song shows the reality ……….
sach mein hota yahi hai………!!!!!!!!
Comment by sonia — March 23, 2007 @ 5:22 pm |