कुछ पल जगजीत सिंह के नाम

जनवरी 16, 2007

वो दिल ही क्या तेरे मिलने की जो दुआ ना करे

Filed under: Albums,गज़ल,जगजीत सिहँ,Ghazal,Jagjit Singh,The Gold Disc — Amarjeet Singh @ 11:09 पूर्वाह्न

वो दिल ही क्या तेरे मिलने की जो दुआ ना करे
मैं तुझको भूल के ज़िन्दा रहूं खुदा ना करे

रहेगा साथ तेरा प्यार ज़िन्दगी बन कर
ये और बात मेरी ज़िन्दगी अब वफ़ा ना करे

ये ठीक है माना नहीं मरता कोई जुदाई में
खुदा किसी को किसी से मगर जुदा ना करे

सुना है उसको मोहब्ब्त दुआयें देती है
जो दिल पे चोट तो खाये पर गिला ना करे

ज़माना देख चुका है परख चुका है उसे
“कातिल” जान से जाये पर इल्तिजा ना करे

ये जो ज़िन्दगी की किताब है


ये जो ज़िन्दगी की किताब है, ये किताब भी क्या खिताब है,
कहीं एक हसीं सा ख्वाब है, कही जान-लेवा अज़ाब है,

कहीं छांव है, कहीं धूप है, कहीं और ही कोई रूप है,
कई चेहरे हैं इसमे छिपे हुये, एक अजीब सा ये निकाब है,

कहीं खो दिया कहीं पा लिया, कहीं रो लिया कहीं गा लिया,
कहीं छीन लेती है हर खुशी, कहीं मेहरबान ला-ज़वाब है,

कहीं आंसू की है दास्तान, कहीं मुस्कुराहटों का है बयान,
कहीं बरकतों की हैं बारिशें, कहीं तिशनगी बेहिसाब है,

Lyrics: Rajesh Reddy
Singer: Jagjit Singh

जनवरी 13, 2007

ये फ़ासले तेरी गलियों के

Filed under: Albums,गज़ल,जगजीत सिहँ,मम्मो,Ghazal,Jagjit Singh,Mammo — Amarjeet Singh @ 11:48 पूर्वाह्न

ये फ़ासले तेरी
गलियों के हमसे तय न हुए -२
हज़ार बार रुके हम
हज़ार बार चले -२

ना जाने कौन सी मट्टी
वतन की मट्टी थी
नज़र में धूल, जिगर
में लिये गुबार चले

हज़ार बार रुके हम
हज़ार बार चले -२

ये कैसी सरहदें उलझी
हुई हैं पैरों में -२
हम अपने घर की तरफ़ उठ
के बार बार चले

हज़ार बार रुके हम
हज़ार बार चले -२

ना रास्ता कहीं ठहरा,
ना मंजिलें ठहरी -२
ये उम्र उडती हुई
गर्द में गुज़ार चले

हज़ार बार रुके हम
हज़ार बार चले -२

ये फ़ासले तेरी
गलियों के हमसे तय न हुए
हज़ार बार रुके हम
हज़ार बार चले

जनवरी 10, 2007

हम भी शराबी तुम भी शराबी


हम भी शराबी तुम भी शराबी!
छलके गुलाबी छलके गुलाबी!
तक़दीर दिल की खाना खराबी !!

जब तक है जीना खुष होके जीले
जब तक है पीना जी भर के पीले

हसरत ना कोई रह जाये बाकी !!

हम भी शराबी तुम भी शराबी….

कल सुबह के दामन में तुम होंगे ना हम होंगे,
बस रेत के सीने पर कुछ नख़्शे कदम होंगे !

बस रात भर के मेहमान हम है,
जुल्फ़ों के शब के थोडे से कम है!

बाक़ी रहेगा सागर ना साक़ी !!

हम भी शराबी तुम भी शराबी!
छलके गुलाबी छलके गुलाबी!
तक़दीर दिल की खाना खराबी !!

तमन्नाओ के बहलावे में अक्सर आ ही जाते है


तमन्नाओ के बहलावे में अक्सर आ ही जाते है,
कभी हम चोट खाते है, कभी हम मुस्कुराते है!

हम अक्सर दोस्तों की बेवफ़ाई सह तो लेते है,
मगर हम जानते है, दिल हमारे टुट जाते है!

किसी के साथ जब बीते हुए लम्होंकी याद आयी,
थकी आखोंमे अश्को के सितारे झिलमिलाते है!

ये कैसा इश्तियाक-ए-बीद है और कैसी मजबुरी,
किसी बज्म तक जा जाके हम क्युँ लौट आते है !

जनवरी 7, 2007

क्या बताऍ के जॉ गई कैसे


क्या बताऍ के जॉ गई कैसे
फिर से दोहराऍ वो घड़ी कैसे
क्या बताऍ के जॉ गई कैसे

किसने रास्ते मे चॉद रखा था
मुझको ठोकर लगी कैसे
क्या बताऍ के जॉ गई कैसे

वक़्त पे पॉव कब रखा हमने
ज़िदगी मुह के बल गिरी कैसे
क्या बताऍ के जॉ गई कैसे

ऑख तो भर आई थी पानी से
तेरी तस्वीर जल गयी कैसे
क्या बताऍ के जॉ गई कैसे

हम तो अब याद भी नही करते
आप को हिचकी लग गई कैसे
क्या बताऍ के जॉ गई कैसे

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