तमन्नाओ के बहलावे में अक्सर आ ही जाते है,
कभी हम चोट खाते है, कभी हम मुस्कुराते है!
हम अक्सर दोस्तों की बेवफ़ाई सह तो लेते है,
मगर हम जानते है, दिल हमारे टुट जाते है!
किसी के साथ जब बीते हुए लम्होंकी याद आयी,
थकी आखोंमे अश्को के सितारे झिलमिलाते है!
ये कैसा इश्तियाक-ए-बीद है और कैसी मजबुरी,
किसी बज्म तक जा जाके हम क्युँ लौट आते है !



