जिस दिन से चला हुँ कभी मुड कर नहीं देखा ,
मैंने कोई गुजरा हुआ मन्जर नहीं देखा ।
पत्थर मुझे कहता हैं मेरा चाहने वाला ,
मैं मोम हुँ उसने कभी मुझे छुकर नहीं देखा ।
बेवक्त अगर जाऊगा सब चौंक पडेगे ,
एक उम हुई दिन में कभी घर नहीं देखा ।
ये फुल मुझे कोई विरासत में मिलें हैं ,
तुमने मेरा काटों भरा बिस्तर नही देखा ।
May 19, 2007
जिस दिन से चला हुँ कभी मुड कर नहीं देखा
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Comment by ckseth — June 3, 2007 @ 9:43 am |