कुछ पल जगजीत सिंह के नाम

May 19, 2007

रात आँखों में कटी पलकों पे जूगनू आये

रात आँखों में कटी पलकों पे जूगनू आये ,
हम हवाओ की तरह जा के उसे छू आये ।

बस गई हैं मेरे एहसास में ये कैसी महक ,
कोई खूशबू मैं लगाऊ तेरी खूशबू आये ।

उसने छू कर मुझे पत्थर से फिर इन्सान किया ,
मुद्दतों बाद मेरि आँखों में आँसू आये ।

मेने दिन रात खुदा से ये दुआ मागीं थी ,
कोई आहट ना हो मेरे दर पे , जब तू आये ।

2 Comments »

  1. there is no match of this combination(Gulzar & Jagjit Singh)

    Comment by sourabh — June 6, 2007 @ 5:38 pm | Reply

  2. रात आँखों में ढली पलकों पे जूगनू आये ..
    you have done a brilliant work.. keep it up brother

    Comment by Chetan — March 29, 2009 @ 12:32 am | Reply


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