रात आँखों में कटी पलकों पे जूगनू आये ,
हम हवाओ की तरह जा के उसे छू आये ।
बस गई हैं मेरे एहसास में ये कैसी महक ,
कोई खूशबू मैं लगाऊ तेरी खूशबू आये ।
उसने छू कर मुझे पत्थर से फिर इन्सान किया ,
मुद्दतों बाद मेरि आँखों में आँसू आये ।
मेने दिन रात खुदा से ये दुआ मागीं थी ,
कोई आहट ना हो मेरे दर पे , जब तू आये ।




there is no match of this combination(Gulzar & Jagjit Singh)
Comment by sourabh — June 6, 2007 @ 5:38 pm |
रात आँखों में ढली पलकों पे जूगनू आये ..
you have done a brilliant work.. keep it up brother
Comment by Chetan — March 29, 2009 @ 12:32 am |