कुछ पल जगजीत सिंह के नाम

May 19, 2007

तेरी आँखों से ही जागे सोये हम

तेरी आँखों से ही जागे सोये हम
कब तक आखिर तेरे ग़म को रोये हम
वक्त का मरहम ज़ख़्मों को भर देता है ,
शीशे को भी ये पत्थर कर देता है ।
रात में तुझको पाऐं , दिन में खोये हम ।
हर आहट पर लगता है तू आया हैं ,
धूप है मेरे पीछे आगे साया है ,
खुद अपनी ही लाश को कब तक ढोये हम ।
तेरी आँखों से ही जागे सोये हम…….

1 Comment »

  1. geet for wating u a painful memories nathing do that

    Comment by takeshay — May 27, 2008 @ 6:00 pm | Reply


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