कुछ पल जगजीत सिंह के नाम

September 12, 2007

कुछ न कुछ तो ज़रूर होना है

Filed under: Albums, Ghazal, Jagjit Singh, Visions, गज़ल, जगजीत सिहँ — Amarjeet Singh @ 6:30 pm

कुछ न कुछ तो ज़रूर होना है,
सामना आज उनसे होना है,

तोड़ो फैको रखो करो कुछ भी,
दिल हमारा है क्या खिलौना है,

जिन्दगी और मौत का मतलब,
तुमको पाना है तुमको खोना है,

इतना डरना भी क्या है दुनिया से,
जो भी होना है वोह तो होना है,

उठ के महफिल से मत चले जाना,
तुमसे रोशन यह कोना कोना है,

कोई दोस्त है न रकीब है

Filed under: Albums, Ghazal, Jagjit Singh, Non Films, Visions, गज़ल, जगजीत सिहँ — Amarjeet Singh @ 6:13 pm

कोई दोस्त है न रकीब है,
तेरा शहर कितना अजीब है,

वो जो इश्क था वो जूनून था,
ये जो हिजर है ये नसीब है,

यहाँ किसका चेहरा पढ़ा करूँ,
यहाँ कौन इतना क़रीब है,

मैं किसे कहूं मेरे साथ चल,
यहाँ सब के सर पे सलीब है,

कौन आया

Filed under: Albums, Ghazal, Jagjit Singh, Visions, गज़ल, जगजीत सिहँ — Amarjeet Singh @ 5:56 pm

कौन आया रास्ते आइना खाना हो गए,
रात रोशन हो गयी दिन भी सुहाने हो गए,

ये भी मुमकिन है के उसने मुझको पहचाना न हो,
अब उसे देखे हुए कितने जमाने हो गए,

जाओ उन कमरों के आईने उठाकर फ़ेंक दो,
वे अगर ये कह रहें हो हम पुराने हो गए,

मेरी पलकों पर ये आंसू प्यार की तौहीन है,
उनकी आंखों से गिरे मोती के दाने हो गए,

कल रात जहाँ मैं था

Filed under: Albums, Ghazal, Jagjit Singh, Visions, गज़ल, जगजीत सिहँ — Amarjeet Singh @ 5:38 pm

हर गोशा गुलिस्तान था कल रात जहाँ मैं था,
एक जशन -ऐ -बहारां था कल रात जहाँ मैं था,

नगमें थे हवाओं में जादू था फ़िज़ाओं मे,
हर साँस ग़ज़लफान था कल रात जहाँ मैं था,

दरिया -ऐ -मोहब्बत में कश्ती  थी जवानी की,
जज्बात का तूफान था कल रात जहाँ मैं था,

महताब था बाहों में जलवे थे निगाहों मे,
हर सिंत चरागाँ था कल रात जहाँ मैं था,

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