कुछ पल जगजीत सिंह के नाम

September 17, 2007

मान मौसम का कहा

मान मौसम का कहा छाई घटा जाम उठा,
आग से आग बुझा फूल खिला जाम उठा,

ऐ मेरे यार तुझे उसकी कसम देता हूँ,
भूल जा शिकवे गिले हाथ मिला जाम उठा,

एक पल भी कभी हो जाता है सदियों जैसा,
देर क्या करना यहाँ हाथ बढ़ा जाम उठा,

प्यार ही प्यार है सब लोग बराबर हैं यहाँ,
मयकदे में कोई छोटा न बड़ा जाम उठा,

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