मेरे क़रीब न आओ के मैं शराबी हूँ,
मेरा शवों जगाओ के मैं शराबी हूँ,
ज़माने भर के निगाहों से गिर चुका हूँ मैं,
नज़र से तुम न गिराओ के मैं शराबी हूँ,
ये अर्ज़ करता हूँ गिर कर खुलुश वालों से,
उठा सको तो उठाओ के मैं शराबी हूँ,
तुम्हारी आँख से भर लूँ सुरूर आंखों में,
नज़र नज़र से मिलाओ के मैं शराबी हूँ,



