फिर नज़र से पिला दीजिये,
होश मेरे उड़ा दीजिये,
छोडिये बर्ह्मी की रविश,
अब जरा मुस्कुरा दीजिये,
बात अफसाना बन जायेगी,
इस कदर मत हवा दीजिये,
आए खुलके मिलिये गले,
सब तकलुफ हटा दीजिये,
कब से मुश्ताके दीदार हु,
अब तो जलवा दिखा दीजिये,
सितम्बर 19, 2007
फिर नज़र से पिला दीजिये
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