कुछ पल जगजीत सिंह के नाम

September 28, 2007

पतित पवन नाम तीहारो

पतित पवन नाम तीहारो,
मुझको पावन कर दो |
पतझड़ जैसा जीवन मेरा,
उसको सावन कर दो |

चरण पड़ा हूँ विनती सुन लो,
पाप-ताप को हरना!
श्रद्धा तुम पर मेरी प्रभु जी
मान हमारा रखना |
कुलषित तन मन निर्मल होवे ,
ऐसा मुझको वर दो ||

पतित हुए हैं करम हमारे ,
अपना मुझे बना लो |
करे याचना ‘दास नारायण ‘
मुझको तुम अपना लो !
हे ! रघुनन्दन – बनो सहायक
मन में आनंद भर दो ||

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