कुछ पल जगजीत सिंह के नाम

October 4, 2007

ला पिला दे शराब ऐ साकी

ढल गया आफताब ऐ साकी,
ला पिला दे शराब ऐ साकी,

या सुराही लगा मेरे मुँह से,
या उलट दे नकाब ऐ साकी,

मैकदा छोड़ कर कहाँ जाऊं,
है ज़माना ख़राब ऐ साकी,

जाम भर दे गुनाहगारों के,
ये भी है इक सवाब ऐ साकी,

आज पीने दे और पीने दे,
कल करेंगे हिसाब ऐ साकी,

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