ऐ खुदा रेत के सेहरा को समंदर कर दे,
यह छलकती हुयी आखो को भी पत्थर कर दे,
तुझ को देखा नही, महसूस किया है मैंने,
आ किसी दिन मेरे अहसास को पय्कर कर दे,
और कुछ डर मुझे, डरकर नही है लकिन,
मेरी चादर मेरे पैरो के, बराबर कर दे,
ऐ खुदा रेत के सेहरा को समंदर कर दे,
यह छलकती हुयी आखो को भी पत्थर कर दे,
तुझ को देखा नही, महसूस किया है मैंने,
आ किसी दिन मेरे अहसास को पय्कर कर दे,
और कुछ डर मुझे, डरकर नही है लकिन,
मेरी चादर मेरे पैरो के, बराबर कर दे,
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