जिन्दगी से बड़ी सज़ा ही नहीं,
और क्या जुर्म है पता ही नहीं,
इतने हिस्सों में बट गया हूँ मैं,
मेरे हिस्से में कुछ बचा ही नहीं,
सच घटे या बडे तो सच न रहे,
झूठ की कोई इन्तेहा ही नहीं,
जड़ दो चांदी में चाहे सोने में,
आइना झूठ बोलता ही नहीं,
जिन्दगी से बड़ी सज़ा ही नहीं,
और क्या जुर्म है पता ही नहीं,
इतने हिस्सों में बट गया हूँ मैं,
मेरे हिस्से में कुछ बचा ही नहीं,
सच घटे या बडे तो सच न रहे,
झूठ की कोई इन्तेहा ही नहीं,
जड़ दो चांदी में चाहे सोने में,
आइना झूठ बोलता ही नहीं,
रिश्ता क्या है तेरा मेरा,
मैं हूँ शब और तू है सवेरा,
तू है चाँद सितारों जैसा,
मेरी किस्मत घोर अँधेरा,
फूलों जैसे राहें तेरी,
काटों जैसा मेरा डेरा,
आता जाता है ये जीवन,
पल-दो-पल का रैन बसेरा,
मैं न हिंदू न मुसलमान मुझे जीने दो,
दोस्ती है मेरा इमान मुझे जीने दो,
कोई एहसान न करो मुझपे तो एहसान होगा,
सिर्फ़ इतना करो एहसान मुझे जीने दो,
सबके दूख-दर्द को अपना समझ के जीना,
बस यही है मेरा अरमान मुझे जीने दो,
लोग होते हैं जो हैरान मेरे जीने से,
लोग होते रहे हैरान मुझे जीने दो,