कुछ पल जगजीत सिंह के नाम

October 16, 2007

ऐसा लगता है जिन्दगी तुम हो

ऐसा लगता है जिन्दगी तुम हो,
अजनबी कैसे अजनबी तुम हो,

अब कोई आरजू नहीं बाकी,
जुस्तजू मेरी आखरी तुम हो,

मैं ज़मीन पर घना अँधेरा हूँ,
आसमानों की चांदनी तुम हो,

दोस्तों से वफ़ा की उम्मीदें,
किस ज़माने के आदमी तुम हो,

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