कुछ पल जगजीत सिंह के नाम

October 16, 2007

सफर मे धुप तो होगी जो चल सको तो चलो

सफर मे धुप तो होगी जो चल सको तो चलो,
सभी हैं भीड़ में तुम भी निकल सको तो चलो,

किसी के वास्ते राहें कहाँ बदलती है,
तुम अपने आप को ख़ुद ही बदल सको तो चलो,

यहाँ किसी को कोई रास्ता नहीं देता,
मुझे गिरा के अगर तुम संभल सको तो चलो,

यही है जिन्दगी कुछ ख्वाब चाँद उम्मीदें,
इन्ही खिलोनों से तुम भी बहल सको तो चलो,

1 Comment »

  1. hi

    Comment by riya — March 18, 2008 @ 7:03 pm | Reply


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