कुछ पल जगजीत सिंह के नाम

October 17, 2007

सच्ची बात कही थी मैंने

सच्ची बात कही थी मैंने,
लोगों ने सूली पे चढाया,
मुझ को ज़हर का जम पिलाया,
फिर भी उन को चैन न आया,

सच्ची बात कही थी मैंने,
ले के जहाँ भी, वक्त गया है,
ज़ुल्म मिला है, ज़ुल्म स्सहा है,
सच का ये इनाम मिला है,

सच्ची बात कही थी मैंने,
सब से बेहतर कभी न बनना,
जग के रहबर कभी न बनना,
पीर पयाम्बर कभी न बनना,

चुप रह कर ही वक्त गुजारो,
सच कहने पे जान मत वारो,
कुछ तो सीखो मुझ से यारो,

सच्ची बात कही थी मैंने,

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