शेख़ जी थोड़ी सी पी कर आइये,
मए है क्या सही फिर हमें बतलाइए,
आप क्यों हैं सारी दुनिया से जुदा,
आप भी दुश्मन मेरे बन जाइए,
क्या है अच्छा क्या बुरा बन्दा नवाज़,
आप समझें तो हमें समझाइए,
जाने दिज्ये अक्ल बातें जनाब,
दिल की सुनिये और पीते जाइए,
शेख़ जी थोड़ी सी पी कर आइये,
मए है क्या सही फिर हमें बतलाइए,
आप क्यों हैं सारी दुनिया से जुदा,
आप भी दुश्मन मेरे बन जाइए,
क्या है अच्छा क्या बुरा बन्दा नवाज़,
आप समझें तो हमें समझाइए,
जाने दिज्ये अक्ल बातें जनाब,
दिल की सुनिये और पीते जाइए,
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Nice work !
and nice ghazal … m a big fan of Jagjit Singh
Comment by Sanket — November 29, 2007 @ 5:00 pm |
Lyricist: Sudarshan Faakir
Comment by Gaurav Kothari — February 10, 2009 @ 4:33 pm |