जीते रहने की सज़ा दे जिन्दगी ऐ जिन्दगी,
अब तो मरने की दुआ दे जिन्दगी ऐ जिन्दगी,
मैं तो अब उकता गया हूँ क्या यही है कायेनात,
बस ये आइना हटा दे जिन्दगी ऐ जिन्दगी,
धुंडने निकला था तुझको और ख़ुद को खो दिया,
तू ही अब मेरा पता दे जिन्दगी ऐ जिन्दगी,
या मुझे अहसास की इस कैद से कर दे रिहा,
वर्ना दीवाना बना दे जिन्दगी ऐ जिन्दगी,



