कैसे कैसे हादसे सहते रहे,
हम यूँही जीते रहे हँसते रहे,
उसके आ जाने की उम्मीदें लिए,
रास्ता मुड़ मुड़ के हम तकते रहे,
वक्त तो गुजरा मगर कुछ इस तरह,
हम चरागों की तरह जलते रहे,
कितने चेहरे थे हमारे आस-पास,
तुम ही तुम दिल में मगर बसते रहे,
कैसे कैसे हादसे सहते रहे,
हम यूँही जीते रहे हँसते रहे,
उसके आ जाने की उम्मीदें लिए,
रास्ता मुड़ मुड़ के हम तकते रहे,
वक्त तो गुजरा मगर कुछ इस तरह,
हम चरागों की तरह जलते रहे,
कितने चेहरे थे हमारे आस-पास,
तुम ही तुम दिल में मगर बसते रहे,
दोस्ती जब किसी से की जाए,
दुश्मनों की भी राय ली जाए,
मौत का ज़हर है फिजाओं में,
अब कहाँ जा के साँस ली जाए,
बस इसी सोच में हूँ डूबा हुआ,
ये नदी कैसे पार की जाए,
मेरे माजी के ज़ख्म भरने लगे,
आज फिर कोई भूल की जाए,
बोतलें खोल के तू पी बरसों,
आज दिल खोल के भी पी जाए,
बेबसी जुर्म है हौसला जुर्म है,
ज़िंदगी तेरी एक-एक अदा जुर्म है,
ऐ सनम तेरे बारे में कुछ सोचकर,
अपने बारे में कुछ सोचना जुर्म है,
याद रखना तुझे मेरा एक जुर्म था,
भूल जाना तुझे दूसरा जुर्म है,
क्या सितम है के तेरे हसीन शहर में,
हर तरफ़ गौर से देखना जुर्म है,