बेबसी जुर्म है हौसला जुर्म है,
ज़िंदगी तेरी एक-एक अदा जुर्म है,
ऐ सनम तेरे बारे में कुछ सोचकर,
अपने बारे में कुछ सोचना जुर्म है,
याद रखना तुझे मेरा एक जुर्म था,
भूल जाना तुझे दूसरा जुर्म है,
क्या सितम है के तेरे हसीन शहर में,
हर तरफ़ गौर से देखना जुर्म है,



Please also tag the lyricist, late Ayaz Jhansvi sa’ab
Comment by Dipak 'Mashal' — दिसम्बर 16, 2011 @ 5:36 पूर्वाह्न |