कुछ पल जगजीत सिंह के नाम

October 23, 2007

काँटों की चुभन पायी फूलों का मज़ा भी

काँटों की चुभन पायी फूलों का मज़ा भी,
दिल दर्द के मौसम में रोया भी हँसा भी,

आने का सबब याद न जाने की ख़बर है,
वो दिल में रहा और उसे तोड़ गया भी,

हर एक से मंजिल का पता पूछ रहा है,
गुमराह मेरे साथ हुआ रहनुमा भी,

‘गुमनाम’ कभी अपनों से जो गम हुए हासिल,
कुछ याद रहे उनमे तो कुछ भूल गया भी,

No Comments Yet »

No comments yet.

RSS feed for comments on this post. TrackBack URI

Leave a comment

Blog at WordPress.com.