सुमिरन कर के चारों बेला
सुमिरन कर के चारों बेला !
जीवन है सुख - दुःख का मेला !!
हरि को काहे मनवा भूला !
हरि तो है सावान का झूला !
काहे को तू रहे अकेला !!१!!
इस मेले में दर्द खिलौना !
ये मेला है इक मृगछौना !
जो सुखी है माटी का ढेला !!२!!
प्रभु का जो करते हैं सुमिरन !
सुमिरन से जीवन है उपवन !
‘दास नारायण’ छोड़ झमेला !!३!!


