तुम पीर हरो ब्रज के स्वामी !
चलते-चलते पग मेरे हारे ,
कारण कौन भुलाये !
सदा रही है आस तुम्हारी ,
मारग कौन बताये !
कभी गिरा न भक्त वो तेरा
तुमने बांह जो थामी !!
चैन – रैन निस दिन खोवत है ,
नयनन आंसू आवे !
शमा करो अपराध हमारा,
बालक भटक ही जावे !
‘दास’ नारायण मुख न बोले ,
तुम हो अंतर्यामी !!



