कुछ पल जगजीत सिंह के नाम

October 25, 2007

तुम पीर हरो ब्रज के स्वामी

तुम पीर हरो ब्रज के स्वामी !
चलते-चलते पग मेरे हारे ,
कारण कौन भुलाये !
सदा रही है आस तुम्हारी ,
मारग कौन बताये !
कभी गिरा न भक्त वो तेरा
तुमने बांह जो थामी !!

चैन – रैन निस दिन खोवत है ,
नयनन आंसू आवे !
शमा करो अपराध हमारा,
बालक भटक ही जावे !
‘दास’ नारायण मुख न बोले ,
तुम हो अंतर्यामी !!

No Comments Yet »

No comments yet.

RSS feed for comments on this post. TrackBack URI

Leave a comment

Blog at WordPress.com.