कुछ पल जगजीत सिंह के नाम

October 29, 2007

यह किसका तस्सवूर है

यह किसका तस्सवूर है, यह किसका फ़साना है,
जो अश्क है आखों में तस्बीह का दाना है,

जो उन पे गुज़रती है, किसने उसे जन है,
आपनी ही मुसीबत है, आपना ही फ़साना है,

आखो में नमी सी है, चुप चुप से वो बैठे है,
नाजुक सी निगाहों में, नाजुक सा फ़साना है,

ये इश्क नही आसन, इतना तो समज लीजिये,
इक आग का दरिया है, और डूब के जाना है,

या वो थे खफा हमसे, या हम है खफा उनसे,
कल उनका जमाना था, आज अपना जमाना है,

तस्बीह का दाना : Bead
तस्सवूर : Contemplation, Fancy, Fantasy, Idea, Imagine, Imagination, Opinion, Thought, Visualise

Blog at WordPress.com.