कुछ पल जगजीत सिंह के नाम

November 6, 2007

फिर आज मुझे तुमको

फिर आज मुझे तुमको बस इतना बताना है,
हँसना ही जीवन है हँसते ही जाना है,

मधुबन हो या गुलशन हो पतझड़ हो या सावन हो,
हर हाल में इन्सां का इक फूल सा जीवन हो,
काँटों में उलझ के भी खुशबू ही लुटाना है,
हँसना ही जीवन है हंसते ही जाना है,

हर पल जो गुज़र जाये दामन को तो भर जाये,
ये सोच के जी लें तो तक़दीर संवर जाये,
इस उम्र की राहों से खुशियों को चुराना है,
हँसना ही जीवन है हँसते ही जाना है,

सब दर्द मिटा दें हम हर ग़म को सज़ा दें हम,
कहते हैं जिसे जीना दुनिया को सिखा दें हम,
ये आज तो अपना है कल भी अपनाना है,
हँसना ही जीवन है हँसते ही जाना है,

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