कुछ पल जगजीत सिंह के नाम

November 16, 2007

है इख्तियार में तेरे

है इख्तियार में तेरे तो मोज़दा कर दे,
वो शख्स मेरा नही है उसे मेरा कर दे,

यह रेक्ज़ार कहीं खत्म ही नही होता,
ज़रा सी दूर तो रास्ता हरा भरा कर दे,

मैं उसके शोर को देखूं वो मेरा सब्र-ओ-सुकून,
मुझे चिराग बना दे उसे हवा कर दे,

अकेली शाम बहुत ही उदास करती है,
किसी को भेज, कोई मेरा हमनवा कर दे,

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