माँ सुनाओ मुझे वो कहानी,
जिसमे राजा न हो न हो रानी,
जो हमारी तुम्हारी कथा हो,
जो सभी के ह्रदय की गाथा हो,
गंध जिसमे हो अपनी धारा की,
बात जिसमे न हो अप्सरा की,
हो न परियां जहाँ आसमानी,
वो कहानी को हँसना सिखा दे,
पेट की भूख को भी मिटा दे,
जिसमे सच की भरी चांदनी हो,
जिसमे उम्मीद की रौशनी हो,
जिसमे न हो कहानी पुरानी,



