कुछ पल जगजीत सिंह के नाम

November 17, 2007

माँ सुनाओ मुझे वो कहानी

माँ सुनाओ मुझे वो कहानी,
जिसमे राजा न हो न हो रानी,

जो हमारी तुम्हारी कथा हो,
जो सभी के ह्रदय की गाथा हो,
गंध जिसमे हो अपनी धारा की,
बात जिसमे न हो अप्सरा की,
हो न परियां जहाँ आसमानी,

वो कहानी को हँसना सिखा दे,
पेट की भूख को भी मिटा दे,
जिसमे सच की भरी चांदनी हो,
जिसमे उम्मीद की रौशनी  हो,
जिसमे न हो कहानी पुरानी,

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