कुछ पल जगजीत सिंह के नाम

November 17, 2007

मुझ में जो कुछ अच्छा है सब उसका है

मुझ में जो कुछ अच्छा है सब उसका है,
मेरा जितना चर्चा है सब उसका है,

उसका मेरा रिश्ता बड़ा पुराना है,
मैंने जो कुछ सोचा है सब उसका है,

मेरे आँखें उसकी नूर से रोशन है,
मैंने जो कुछ देखा है सब उसका है,

मैंने जो कुछ खोया था सब उसका था,
मैंने जो कुछ पाया है सब उसका है,

जितनी बार मैं टूटा हूँ वो टूटा था,
इधर उधर जो बिखरा है सब उसका है,

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