कुछ पल जगजीत सिंह के नाम

November 17, 2007

वो रुलाकर हंस न पाया देर तक

वो रुलाकर हंस न पाया देर तक,
जब मैं रो कर मुस्कुराया देर तक,

भूलना चाहा अगर उसको कभी,
और भी वो याद आया देर तक,

भूखे बच्चों की तसल्ली के लिए,
माँ ने फिर पानी पकाया देर तक,

गुनगुनाता जा रहा था इक फकीर,
धुप रहती है न साया देर तक,

No Comments Yet »

No comments yet.

RSS feed for comments on this post. TrackBack URI

Leave a comment

Blog at WordPress.com.