कुछ पल जगजीत सिंह के नाम

November 19, 2007

हम दोस्ती एहसान वफ़ा भूल गए है

हम दोस्ती एहसान वफ़ा भूल गए है,
जिंदा तो है जीने की अदा भूल गए है,
हम दोस्ती एहसान वफ़ा भूल गए है,

खुशबु जो लुटाती है मसलती है उसी को,
एहसान का बदला यही मिलता है कली को,
एहसान तो लेते है सिला भूल गए है,

करते है मोहब्बत का और एहसान का सौदा,
मतलब के लिए करते है इमान का सौदा,
डर मौत का और खौफ-ऐ-खुदा भूल गए है,

अब मोम पिघल कर कोई पत्थर नही होता,
अब कोई भी कुर्बान किसी पर नही होता,
यू भटकते है मंजिल का पता भूल गए है,

1 Comment »

  1. to hamse poochh jao.

    Comment by vinod — December 8, 2007 @ 5:03 pm | Reply


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