हुस्न वालो का ऐतराम करो,
कुछ तो दुनिया मे नेक काम करो,
शेख जी आये है बव्जू होकर,
अब तो पीने का इन्तेजाम करो,
अभी बरसेंगे हर तरफ़ जलवे,
तुम निगाहों का एह्त्माम करो,
लोग डरने लगे गुनाहों से,
बारिश-ऐ-रहमत-ऐ-तमाम करो,
November 19, 2007
हुस्न वालो का ऐतराम करो
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बढिया!!!
Comment by परमजीत बाली — November 19, 2007 @ 9:15 pm |