कुछ पल जगजीत सिंह के नाम

November 20, 2007

आखो से यूं आंसू

आखो से यूं आंसू ढलके,
सागर से जैसे मए छलके
हम समझे मफ्हुम-ऐ-भरा,
कोई आया भेष बदल के,
काश बता सकते परवाने,
क्या खोया, क्या पाया जलके
मंजिल तक वो क्या पहुचा,
जिसने देखि राह न चलके,

1 Comment »

  1. Iwant sing a gagal

    Comment by guddu — August 15, 2009 @ 6:46 pm | Reply


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