कुछ पल जगजीत सिंह के नाम

नवम्बर 21, 2007

अब तो घबरा के ये कहते है के मर जायेंगे


अब तो घबरा के ये कहते हैं के मर जायेंगे,
मर के भी चैन ना पाया तो किधर जायेंगे,

लाये जो मस्त हैं तुरबत पे गुलाबी आँखें,
और अगर कुछ नहीं दो फूल तो धर जायेंगे,

हम नहीं वो जो करें खून का दावा तुझसे,
बल्क़ि पूछेगा ख़ुदा भी तो मुकर जायेंगे,

Lyrics: Ibrahim Zauq
Singer: Jagjit Singh

रातें थी सूनी सूनी


रातें थी सूनी सूनी, दिन भी उदास थे मेरे,
तुम मिल गए तो जागे सोये हुए सवेरे,
खामोश इन लबो को एक रागिनी मिली है,
मुरझाये से गुलो को एक ताजगी मिली है,
घेरे हुए थे मुझ को कब से घने अंधेरे,
रूठा हुआ था मुझसे, खुशियों को है तराना,
लगता था जिंदगानी, बन जायेगी फ़साना,
हर सु लगे हुए थे तन्हाइयो के फेरे,

सर ही न झुका


सर ही न झुका, दिल भी तो झुका,
कल्याण यंही होगा, निर्वाण यही होगा,

इन दीवारों से बातें कर,
मत छलका तू मन का सागर,

जीवन में यह सन्नाटा भर,
फिर कान लगा, कल्याण यंही होगा,

Singer: Jagjit Singh

Theme: Rubric. Blog at WordPress.com.

Follow

Get every new post delivered to your Inbox.

Join 31 other followers