अजब अपना हाल होता जो विसाल-ए-यार होता,
कभी जान सदक़े होती कभी दिल निसार होता,
ना मज़ा है दुश्मनी में ना है लुत्फ़ दोस्ती में,
कोई ग़ैर ग़ैर होता कोई यार यार होता,
ये मज़ा था दिल्लगी का के बराबर आग लगती,
ना तुम्हे क़रार होता ना हमें क़रार होता,
तेरे वादे पर सितमगर अभी और सब्र करते,
अगर अपनी ज़िंदगी का हमें ऐतबार होता,
Lyrics: Daag Dehlvi
Singer: Jagjit Singh



