कुछ पल जगजीत सिंह के नाम

November 22, 2007

बस कि दुश्वार है हर काम का आसां होना

बस कि दुश्वार है हर काम का आसां होना,
आदमी को भी मयस्सर नहीं इन्सां होना,

की मेरे क़त्ल के बाद उस ने जफ़ा से तौबा,
हाय उस जूदपशेमा का पशेमां होना,

हैफ़ उस चार गिरह कपड़े की क़िस्मत ‘ग़ालिब’,
जिस की क़िस्मत में हो आशिक़ का गरेबां होना,

Lyrics: Mirza Ghalib
Singer: Jagjit Singh, Chitra Singh

1 Comment »

  1. I think ज़ोदपशेमा shuold be जूदपशेमा

    Comment by Dilshad — November 24, 2007 @ 3:29 pm | Reply


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