मेहरबां हो के बुला लो मुझे चाहो जिस वक़्त,
मै गया वक़्त नहीं हूं के फिर आ भी ना सकूं,
ज़ौफ़ में ता नये अग़ियार का शिकवा क्या है,
बात कुछ सर तो नहीं है के उठा भी ना सकूं,
ज़हर मिलता ही नहीं मुझको सितमगर वरना,
क्या क़सम है तेरे मिलने की के खा भी ना सकूं,
Lyrics: Mirza Ghalib
Singer: Jagjit Singh, Chitra Singh



this is a very nice pherse………..
ज़हर मिलता ही नहीं मुझको सितमगर वरना,
क्या क़सम है तेरे मिलने की के खा भी ना सकूं,
Comment by mahesh — मार्च 12, 2008 @ 10:05 पूर्वाह्न |