पत्ता पत्ता बूटा बूटा हाल हमारा जाने है,
जाने ना जाने गुल ही ना जाने बाग़ तो सारा जाने है,
चारागरी बीमारी-ए-दिल की रस्म-ए-शहर-ए-हुस्न नहीं,
वर्ना दिलबर-ए-नादां भी इस दर्द का चारा जाने है,
मेहर-ओ-वफ़ा-ओ-लुत्फ़-ओ-इनायत एक से वाक़िफ़ इन में नहीं,
और तो सब कुछ तन्ज़-ओ-कनाया रम्ज़-ओ-इशारा जाने है,
Lyrics: Meer Taqi ‘Meer’
Singer: Jagjit Singh



