ये किसका तसव्वुर है ये किसका फ़साना है,
जो अश्क है आँखों में तस्बीह का दाना है,
आँखों में नमी सी है चुप-चुप से वो बैठे हैं,
नज़ुक सी निगाहों में नाज़ुक सा फ़साना है,
ये इश्क़ नहीं आसां इतना तो समझ लीजे,
एक आग का दरिया है और ड़ूब के जाना है,
या वो थे ख़फ़ा हम से या हम थे ख़फ़ा उनसे,
कल उन का ज़माना था आज अपना ज़माना है,
Lyrics: Jigar Moradabadi
Singer: Chitra Singh



