एक चमेली के मंड़वे तले
मैकदे से ज़रा दूर
उस मोड़पर…
दो बदन…
दो बदन……
दो बदन प्यार की आग में जल गए
प्यार हर्फ़-ए-वफ़ा
प्यार उनका ख़ुदा
प्यार उनकी चिता
दो बदन…
दो बदन……
दो बदन प्यार की आग में जल गए
ओस में भीगते चांदनी में नहाते हुए
जैसे दो ताज़ा रु ताज़ा दम फूल पिछले पहर
ठंड़ी ठंड़ी सुबुक रौ चमन की हवा सर्फ़-ए-मातम हुई
काली काली लटों से लिपट गर्म रुख़सार पर एक पल के लिये रुक गई
हमने देखा उन्हे
दिन में और रात में
नूर-ओ-ज़ुल्मात में
दो बदन…
दो बदन……
दो बदन प्यार की आग में जल गए
मस्जिदों के मुनारों ने देखा उन्हे
मंदिरों के किवड़ों ने देखा उन्हे
मैकदे की दरारों ने देख उन्हे
दो बदन…
दो बदन……
दो बदन प्यार की आग में जल गए
अज़ अज़ल ता अबद
ये बता चाराग़र
तेरी ज़ंबील में
नुस्ख़ा-ए-कीमिया-ए-मोहब्बत भी है
कुछ इलाज-ओ-दावा-ए-उल्फ़त भी है
दो बदन…
दो बदन……
दो बदन प्यार की आग में जल गए
दो बदन प्यार की आग में जल गए
दो बदन प्यार की आग में जल गए
Unsung lines in Bold Italic
Lyrics: Makhdoom Mohiuddin
Singer: Jagjit Singh




phulo se mehekta pyar chita ban gaya,pyar ki ruswai,dil pasij kar rah gaya ye nazm padhkar.behad dil khichi.
Comment by mehhekk — December 24, 2007 @ 2:02 pm |