कुछ पल जगजीत सिंह के नाम

जून 18, 2008

रिंद जो मुझको समझते हैं


रिंद जो मुझको समझते हैं उन्हे होश नहीं
मैक़दासाज़ हूं मै मैक़दाबरदोश नहीं

पांव उठ सकते नहीं मंज़िल-ए-जाना के ख़िलाफ़
और अगर होश की पूछो तो मुझे होश नहीं

अब तो तासीर-ए-ग़म-ए-इश्क़ यहां तक पहुंची
के इधर होश अगर है तो उधर होश नहीं

मेहंद-ए-तस्बीह तो सब हैं मगर इदराक कहां
ज़िंदगी ख़ुद ही इबादत है मगर होश नहीं

मिल के इक बार गया है कोई जिस दिन से ‘जिगर’
मुझको ये वहम है शायद मेरा था दोष (?) नहीं

ये अलग बात है साक़ी के मुझे होश नहीं
वर्ना मै कुछ भी हूं एहसानफ़रामोश नहीं

जो मुझे देखता है नाम तेरा लेता है
मै तो ख़ामोश हूं हालत मेरी ख़ामोश नहीं

कभी उन मदभरी आँखों से पिया था इक जाम
आज तक होश नहीं होश नहीं होश नहीं

Singer: Jagjit Singh
Lyrics: Jigar Moradabadi, Abdul Hameed ‘Adam’

वस्ल की रात


वस्ल की रात तो राहत से बसर होने दो
शाम से ही है ये धमकी के सहर होने दो

जिसने ये दर्द दिया है वो दवा भी देगा
लादवा है जो मेरा दर्द-ए-जिगर होने दो

ज़िक्र रुख़सत का अभी से न करो बैठो भी
जान-ए-मन रात गुज़रने दो सहर होने दो

वस्ल-ए-दुश्मन की ख़बर मुझ से अभी कुछ ना कहो
ठहरो ठहरो मुझे अपनी तो ख़बर होने दो

Singer: Jagjit Singh

हर गोशा गुलिस्तां था


हर गोशा गुलिस्तां था कल रात जहां मै था
एक जश्न-ए-बहारां था कल रात जहां मै था

नग़्मे थे हवाओं में जादू था फ़िज़ाओं में
हर साँस ग़ज़लफ़ां था कल रात जहां मै था

दरिया-ए-मोहब्बत में कश्ती थी जवानी की
जज़्बात का तूफ़ां था कल रात जहां मै था

मेहताब था बाहों में जलवे थे निगाहों में
हर सिम्त चराग़ां था कल रात जहां मै था

‘ख़ालिद’ ये हक़ीक़त है नाकर्दा गुनाहों की
मै ख़ूब पशेमां था कल रात जहां मै था

Singer: Jagjit Singh
Lyrics: Khalid Kuwaiti

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