इन्तिहा आज इश्क की कर दी,
आप के नाम ज़िन्दगी कर दी,
था अँधेरा गरीब खाने में,
आप ने आ के रोशनी कर दी,
देने वाले ने उन को हुस्न दिया,
और अता मुझ को आशिकी कर दी,
तुम ने जुल्फों को रुख पे बिखरा कर,
शाम रंगीन और भी कर दी
Lyrics: पय्यम सईदी
Singer: जगजीत सिंह




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Comment by Anant Deo — April 24, 2009 @ 3:09 am |
EXCELLENT GHAZAL
Comment by RAVI PAREEK — May 7, 2009 @ 5:54 pm |
one more beautiful gazal sung by gazal samrat….
Comment by harish — May 20, 2009 @ 3:12 pm |